कहानी न्यूयॉर्क के एक विज्ञापन कार्यकर्ता चार्ल्स के बारे में है, जो अपने काम के तनाव और अपनी पत्नी के साथ अनबन से परेशान है। वह ग्रैंड सेंट्रल टर्मिनल में एक "तीसरा लेवल" ढूंढता है, जो एक 1890 के दशक के न्यूयॉर्क शहर में ले जाता है। यह स्तर आधिकारिक रिकॉर्ड में मौजूद नहीं है।
इस "तीसरे लेवल" पर, उसे एक अलग ही जीवन दिखाई देता है - एक ऐसी दुनिया जहाँ लोग पुराने कपड़े पहनते हैं, घोड़े से गाड़ियाँ चलती हैं, और जीवन शैली काफी सरल है। वह इस दुनिया में एक नए व्यक्ति की तरह महसूस करता है, एक अजीब तरह की शांति और सुकून पाता है। वह एक महिला से मिलता है, जिससे उसे प्यार हो जाता है।
कहानी अनिश्चितता में समाप्त होती है। यह स्पष्ट नहीं है कि तीसरा स्तर वास्तविक है या चार्ल्स की मानसिक स्थिति का एक उत्पाद। वह अपनी पत्नी से अपनी खोज बताता है, लेकिन उसकी पत्नी उसे मानसिक रोगी समझती है और उसे मनोचिकित्सक के पास ले जाती है। चार्ल्स अंततः मानसिक संस्थान में भर्ती हो जाता है, लेकिन एक पत्र में वह डॉक्टर को तीसरे लेवल पर मिली एक पुरानी मुद्रा भेजता है, जिससे कहानी की वास्तविकता पर सवाल उठते हैं।
कहानी कई तरह से व्याख्या की जा सकती है:
* मानसिक बीमारी का चित्रण: यह चार्ल्स के मानसिक स्वास्थ्य के बिगड़ने का प्रतिनिधित्व कर सकती है, जहाँ वह वास्तविकता से बचने के लिए एक कल्पना की दुनिया बनाता है।
* वास्तविकता की प्रकृति पर सवाल: यह कहानी वास्तविकता और कल्पना के बीच की रेखा को धुंधला करती है, और यह सवाल उठाती है कि क्या हमारी अनुभूतियाँ हमेशा वास्तविक होती हैं।
* भगोड़े की चाहत: चार्ल्स अपने व्यस्त, तनावपूर्ण जीवन से बचने की चाह रखता है और तीसरा लेवल उसे एक शांतिपूर्ण जीवन का वादा करता है।
* समय यात्रा की संभावना: कुछ पाठक इसे समय यात्रा की संभावना के रूप में भी व्याख्या करते हैं।
अंततः, कहानी पाठक पर अपनी व्याख्या छोड़ देती है। यह एक मनोवैज्ञानिक थ्रिलर है जो मन, वास्तविकता और कल्पना की प्रकृति के बारे में गंभीर प्रश्न उठाता है। इसकी ताकत इसकी अनिश्चितता और बहुआयामी व्याख्याओं की संभावना में है।